सेक्स समस्या

हमारी संस्कृति, धर्म, अर्थ, सेक्स और मोक्ष पर आधारित है। मनुष्य की सभी आकांक्षाएं, अभिलाषाऐं इन्हीं चारों के अन्तर्गत रहती हैं, शरीर के पोषण हेतु सेक्स, बुद्धि हेतु कर्म और आत्मा के लिए मोक्ष की आवश्यकता पड़ती है। बिना सेक्स के मन कुंठित और निकम्मा बन जाता है। बिना धर्म यानी सत्य, न्याय के बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है और बिना मोक्ष के आत्मा पतित बन जाती है।

सभी इच्छाओं व सेक्सनाओं यानी त्वचा, आंख, जिव्हा, नाक, कान इन पांचों इन्द्रियों की इच्छानुसार स्पर्श, रूप, रस, गंध, शब्द इन विषयों में प्रवृति ही सेक्स शब्द का व्यापक अर्थ है। साधारण अर्थ में सेक्स शब्द चुंबन, आलिंगन, मुख, कपोल, स्तन, नितम्ब आदि विशेष अंगों के स्पर्श, रति करने से जो आनंद की प्राप्ति होती है वह सेक्स है।

मनुष्य सेक्स की अभिलाषा लिए बचपन से योन अवस्था तक पहुंच जाता है और वह मन ही मन अच्छे अच्छे सपने सोचता है की जब वह जवान होगा तब वह किसी स्त्री के साथ विवाह करेगा लैंगिक सम्बंद स्थापित करेगा सम्भोग के सुख प्राप्त करेगा परन्तु उसे यह नही पता होता की वह बचपन में की गयी भूल के कारण या दूसरी स्त्रियों के साथ बनाये गए असामाजिक रिश्तो में वो अपना योवन बर्बाद कर चूका है

आज पूरी दुनिया में ऐसे बहुत से लोग है जोकी यौन‍रोगों से पीड़ित हैं । भारत में ही करीब दस करोड़ व्यक्तियों के यौन विकारों से पीड़ित होने की संभावना है। ऐसे मामलों में दिक्कत यह होती है कि रोगी खुद इसे प्रकट नहीं करना चाहता भारतीय पुरुष यदि जल्द ही अपने खान-पान की आदतों में सुधार नहीं लाते हैं और नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा नहीं बनाते हैं तो 2025 तक दुनिया में सबसे ज्यादा सेक्स समस्याओं से पीड़ित व्यक्ति भारत में होंगे।

यह चेतावनी भले ही अच्छी नहीं लगे लेकिन यह कड़वी सच्चाई है कि एशिया में सबसे ज्यादा सेक्स समस्याओं के शिकार सर्वाधिक व्यक्ति भारत में हैं। हाल में स्वीडन के गोटेबर्ग शहर में संपन्न दसवीं ‘वर्ल्ड कांग्रेस फॉर सेक्सुएल हेल्थ’ में बताया गया कि दुनिया में सबसे ज्यादा सेक्स समस्याओं के शिकार अधिकतर व्यक्ति एशिया, अफ्रीका और उत्तर अमेरिका में हैं

एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में एक शोध में यह आशंका व्यक्त की गई है जिसमें 2025 तक सबसे ज्यादा सेक्स समस्याओं से पीड़ित व्यक्तियों की सर्वाधिक संख्या भारत में होगी। इसके लिए जिम्मेवार कारणों में ग्लोबल वार्मिंग समेत भारतीयों की अनियमित जीवन शैली तथा विपरीत सम्भोग के तरीके आदि हैं।

कारण

स्वस्थ शरीर के साथ स्वस्थ मन का होना सेक्स के लिए अति आवश्यक है। स्वस्थ मन और स्वस्थ शरीर में सेक्स विकार की संभावना नहीं होती। संभोग की इच्छा एक तीव्रसंवेगी मनोभाव है। कामेच्छा होने पर पुरूष इंद्रिय की ओर रक्त का प्रवाह बढ़ता है। फलतः लिंग में तनाव निर्मित होता है। मन में भय, शोक आदि भावों से परेशान हो तो यह तनाव समाप्त या कम हो जाता है। उक्त कारणों से पुरूष के मन में हीनभावना का जन्म होता है। हीनभावना और सेक्सशक्ति में परस्पर घनिष्ट सम्बन्ध है।

रतिकर्म में पुरूष असफल निम्न कारणों से होता है

1 जिस स्त्री को पुरूष न चाहता हो, उसके पास जाने से।

2 स्त्री के पास रति इच्छा से जाने वाला पुरूष मन में पहले से ही विचार करने लगे कि मैं असफल न हो जाऊं।
3 संकोच होने, शर्माने, रति अनिच्छा तथा रतिक्रिया का पूर्ण ज्ञान न होने पर।
4 स्त्री का असहयोग, यानि स्त्री का संभोग से बचने के नित नये बहाने बनाने से, अनैतिकता का डर इत्यादि के कारण।
5 प्रसन्नता, प्यार, मनुहार के अभाव में रतिक्रिया के प्रति उदासीनता आ जाती है।
6 काला धन, काला मन, कलुषित वातावरण तथा दूषित आहार विहार से सेक्स में नाकामी का प्रतिशत बढ़ रहा है। आहार विहार स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।

7 संकुचित जगह व अधिक व्यक्तियों के रहने के स्थान पर, किसी के द्वारा देख लेने के डर, संकोच से संभोग को शीघ्र संपादित करने को प्रेरित करती है। इससे धीरे-धीरे व्यक्ति शीघ्रपतन का शिकार हो जाता है।

8 जो व्यक्ति हृष्ट-पुष्ट है, स्त्री संग की इच्छा भी हो, परन्तु मैथुन न करे। इससे वीर्य में ह्रास व सेक्स शक्ति में गिरावट उत्पन्न होती है।

9 भोजन के तुरन्त बाद रक्त का अधिक संचार भोजन को पचाने में लग जाता है तथा लिंग में पूर्ण रक्त संचार न होने से तनाव की स्थिति नहीं आ पाती, परिणामतः संभोग अधूरा रह जाता है।

10 60 वर्ष की आयु के बाद भी सेक्स में अरूचि या हृास की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

11 हस्तमैथुन से शरीर के सभी अंग दुर्बल हो जाते हैं, नेत्रों की ज्योति कम जो जाती है, भूख कम हो जाती है। आंतो की क्रिया धीमी हो जाती है तथा रक्त संचार की कमी हो जाने से लिंग में उत्तेजना नहीं आ पाती।

12 गुदा मैथुन सबसे लज्जाजनक है, गुदा एक सख्त जगह है, इससे लिंग में चोट, रगड़ व नसों पर अधिक जोर पड़ने से ढीलापन आता है। अंततः स्त्री संसर्ग में असमर्थता आ जाती है।

13 प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि की प्रारम्भिक अवस्था में पुरूष में संभोग की बाढ़ सी आ जाती है लेकिन जब यह ग्रन्थि और कुछ बड़ी होती है, तो सेक्स शक्ति लुप्त हो जाती है।

14 मधुमेह का शरीर के प्रत्येक अंग पर घातक प्रभाव पड़ता है। मधुमेह से गंभीर रूप से पीडित व्यक्ति के लिंग में तनाव उत्पन्न ही नहीं होता।

15 नशीले पदार्थो से पहले तो यौन शक्ति में वृद्धि होती है, धीरे-धीरे इनका असर कम होता जाता है और शीघ्रपतन, मर्दाना कमजोरी, शुक्राणु की कमी आदि रोग हो जाते हैं।

16 माह में एक दो बार स्वप्नदोष हो जाए तो चिंता का कारण नहीं है, यदि माह में अनेकों बार ऐसा हो तो यह विकार है। स्त्री भोगी, भोग में आनन्द प्राप्त करता है, जबकि उपरोक्त व्यक्ति ग्लानि, थकावट, कब्ज किसी कार्य में दिल न लगना, यौन शक्ति ह्रास, सैक्स सम्बन्धी कई परेशानियों से घिर जाता है।

सिकंदर आजम कैप्सूल

यह शिकायत होना आजकल आम बात हो गई है। गलत आचार-विचार इसका प्रमुख कारण है। इस समस्या को दूर करने के लिए सिकंदर आजम कैप्सूल बहुत अधिक प्रभावशाली है यह एक हर्बल कैप्सूल है जो लिंग आकार और कामेच्छा बढ़ाता है. यह अनूठा लिंग वृद्धि कैप्सूल समय से पहले थकना या पतन हो जाना आदि समस्याओं को भी दूर करता है. यदि आप जब प्यार करने से शर्मिंदा हो रहे हैं, वहाँ केवल एक ही विकल्प है यानी सिकंदर आजम कैप्सूल

यह प्राकृतिक रूप से लिंग की वृधि के लिए भी सेक्स करता है। दैनिक रूप से एक कैप्सूल, नयी उमंग नया जोश पैदा करता है साथ ही पुरुषों में नपुंसकता की सारी समस्याओं को दूर करता है. सिकंदर आजम कैप्सूल, सिर्फ एक दिन में एक बार सेवन करने से यह लिंग में रक्त प्रवाह को तीर्व कर देता है और कार्पस केवेरनोसम नामक उतक में रक्त इकट्टा होकर लिंग का आकर बढ़ा देता है. सिकंदर आजम हर्बल कैप्सूल फार्मूले की मदद से आप पहले से कहीं ज्यादा बेहतर सेक्स करने में सफल होंगे. अब तक दुनिया भर के लाखों पुरुषों को प्राकृतिक रूप से लाभ पहुंचा चूका है.

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-: – अधिक से अधिक यौन आत्मविश्वास और नियंत्रण का एहसास

विशेष

जिस तरह विधुत के सही इस्तेमाल से आप रौशनी पाते हैं व् ग़लत से दुर्घटना वैसे ही हस्थमैथुन के विषय में सही जानकारी हो तो आप किशोरावस्था में आने वाले तूफानों का भी आनंद ले सकेंगे और तनाव मुक्त रह सकेंगे लेकिन जानकारी ग़लत हो तो भटकाव निश्चित है।यदि आपको किसी प्रकार की सेक्स समस्या है तो हमें बताये हम उसका निवारण अवश्य ही बतायेगे

सेक्स सम्बन्धी विशेषज्ञ इसे एकदम स्वाभाविक व्यवहार (normal behavior) मानते हैं। वीर्य का स्खलित होना स्वाभाविक होता है। मैथुन से न सही तो स्वप्न दोष से होगा। किसी भी रूप में हो अपराधबोध निराधार है।

फूटपाथ पर बिकने वाले सस्ते साहित्य से बचे। फिल्मे देखकर किसी कास्सिनोवा (Casanova) या सुपरमैन (Superman) की भ्रान्ति न पाले। यदि किसी तरह की लिंग व् सेक्स सम्बन्धी शंका या समस्या है तो सीधे किसी विशेषज्ञ से मिले। यदि किसी तरह का डर, ग्लानी, या विवाह के पश्चात आने वाली किसी समस्या का डर है तो तुंरत हमसे संपर्क करे।

“अति सर्वत्र वर्जयेत” – अति हर हालत में हानिकारक है। कहीं ऐसा तो नही की आप हर वक्त, दिन रात किसी दिवास्वप्न (fantasy) में जीते हैं और हस्थमैथुन आपके दिलो-दिमाग पर छाया रहता है। यदि है तो उससे बाहर आए। हर सेक्स का वक़्त होता है। किशोरावस्था में बहुत कुछ और भी है जहाँ आप अपना मन लगा सकते हैं। पढ़ाई , खेल, फिल्मे, दोस्त, परिवार, कला इत्यादि।

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