लिंग दोष के लिए प्रभावी उपचार
लिंग (penis) से तात्पर्य उन पहचानों या लक्षणों से जिनके द्वारा जीवजगत् में नर को मादा से पृथक् पहचाना जाता है। जंतुओं में असंख्य जंतु ऐसे होते हैं जिन्हें केवल बाह्य चिह्नों से ही नर, या मादा नहीं कहा जा सकता।
पुरूष का लिंग लंबाई से और स्त्री की योनि गहराई से नापी जाती है। संभोग का सम्बन्ध मन और काया दोनों से होता है। जहां तक मन के सम्बन्ध का ज्ञान है, इसमें स्त्री और पुरूष का पारस्परिक आकर्षण और परस्पर शरीर मिलने की प्रबल आकांक्षा है। जहां तक काया अर्थात शरीर के सम्बन्ध का प्रश्न है, इसमें पुरूष के शिश्न अर्थात लिंग और स्त्री की योनि के सम्भोग की तीव्र इच्छा है, जिसमें एक या दोनों पक्षों का विशेष विधि से निज जननेन्द्रियों का परस्पर घिसना या रगड़ना, फलस्वरूप पुरूष का वीर्यपात होना और स्त्री को एक विशेष प्रकार के सुख या आनन्द की अनुभूति होना, संभोग आनंद के लिए लिंग का आकार एक अतिआवश्यक तत्व है बिना लिंग वृद्धि के सम्भोग का आनंद प्राप्त नही किया जा सकता है जो व्यक्ति सम्भोग नही कर पाते उनमे से ९५% व्यक्ति को लिंग का आकार छोटा होने की समस्या होती क्योंकि बिना बड़े लिंग के कोई भी व्यक्ति सम्भोग नही कर सकता अतः व्यक्ति के लिए लिंग का आकर व लिंग का सीधा होना अत्यंत अवश्यक है
लिंग के आकार के अनुसार लिंग के तीन भेद हैं।
1. शश ;खरगोशद्ध
2.वृष ;बैलद्ध
3.अश्व ;घोड़ाद्ध।

सेक्स रुचि में कमी के कुछ प्रमुख कारण
- नशीले पदार्थो से पहले तो यौन शक्ति में वृद्धि होती है, धीरे-धीरे इनका असर कम होता जाता है और शीघ्रपतन, मर्दाना कमजोरी, शुक्राणु की कमी आदि रोग हो जाते हैं।
- तीखे, खट्टे, गर्म और नमकीन पदार्थों का ज्यादा सेवन करने से पित्त कुपित होकर वीर्य का क्षय करता है, जिससे नपुंसकता पैदा होती है।
- मधुमेह का शरीर के प्रत्येक अंग पर घातक प्रभाव पड़ता है। मधुमेह से गंभीर रूप से पीडित व्यक्ति के लिंग में तनाव उत्पन्न ही नहीं होता।
- भयंकर रोग के कारण या शिश्न में हुई किसी व्याधि के कारण अथवा किसी चोट के कारण वीर्यवाहिनी नस के कट जाने से
- अत्यधिक मैथुन करने से। हस्तमैथुन से शरीर के सभी अंग दुर्बल हो जाते हैं, नेत्रों की ज्योति कम जो जाती है, भूख कम हो जाती है। आंतो की क्रिया धीमी हो जाती है तथा रक्त संचार की कमी हो जाने से लिंग में उत्तेजना नहीं आ पाती।
- 60 वर्ष की आयु के बाद भी काम में अरूचि या ह्रास की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
- 13 प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि की प्रारम्भिक अवस्था में पुरूष में संभोग की बाढ़ सी आ जाती है लेकिन जब यह ग्रन्थि और कुछ बड़ी होती है, तो काम शक्ति लुप्त हो जाती है।
लिंग में वृद्धि कैसे सम्भव है?
जब कोई व्यक्ति सैक्स से सम्बन्धित कामुक चिन्तन करता है या कोई अश्लील किताब, या उसके बारे में सोचता है, या स्त्री से सम्भोग की इच्छा रखता है तो उसके मस्तिष्क कुछ विशेष हार्मोन का स्रवण करते हैं जो लिंग में रक्त के प्रवाह को तीव्र कर देता है और कोपर्स केवेरनोसम (Corpus Cavernosum) नामक ऊतक में रक्त इकट्ठा होकर लिंग का आकार बढ़ा देता है। पूर्ण उत्तेजित अवस्था में लिंग के इन उतकों में रक्त अपनी अधिकतम मात्रा में होता है। इस अवस्था में लिंग अधिक ठोस, दृढ़ व सीधा हो जाता है। वीर्य स्खलन के समय जब व्यक्ति मानसिक रूप से संतुष्ट हो जाता है तो दूसरे हार्मोन एक कोपर्स स्पोंजीयोसम (Corpus Spongiosum) को उत्तेजित करते है जो वीर्य को वेग व गति प्रदान करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी कमी की वजह से पूरा तंत्र ही गड़बड़ा जाता है। पतले, टेढे, छोटे व आगे से मोटे व पीछे से पतले लिंग उक्त पूरी प्रक्रिया में किसी न किसी दोष से पीड़ित होते हैं। इस प्रकार के लिंग वाले लोगों में केवेरनोसम और स्पान्जियोसम की कोशिकाऐं पूरी तरह से सुगठित नहीं होती जिनसे इनमें अधिक रक्त ग्रहण करने की क्षमता व इन कोशिकाओं में अधिक समय तक रक्त रोके रखने की क्षमता नहीं होती।
सिकंदर-ए-आज़म कैप्सूल
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हमारे हर्बल खाने व लगाने के इलाज से कोपर्स केवेरनोसम (Corpus Cavernosum) और कोपर्स स्पोंजीयोसम (Corpus Spongiosum) ऊतकों में वृद्धि होती है, इन ऊतकों की कोशिकाओं का आकार बढ जाता है जिनमें रक्त इकट्ठा होता है जिसके फलस्वरूप लिंग के आकार में वृद्धि होती है और इसके साथ-साथ लिंग में उत्थान क्षमता भी बढ़ जाती है।
यह शिकायत होना आजकल आम बात हो गई है। गलत आचार-विचार इसका प्रमुख कारण है। इस समस्या को दूर करने के लिए सिकंदर-ए-आज़म कैप्सूल बहुत अधिक प्रभावशाली है यह एक हर्बल कैप्सूल है जो लिंग आकार और कामेच्छा बढ़ाता है. यह अनूठा लिंग वृद्धि कैप्सूल समय से पहले थकना या पतन हो जाना आदि समस्याओं को भी दूर करता है. यदि आप जब प्यार करने से शर्मिंदा हो रहे हैं, वहाँ केवल एक ही विकल्प है यानी सिकंदर आजम कैप्सूल
इस इलाज से 20-30 प्रतिशत लिंग आयतन वृद्धि सम्भव है तथा लिंग में 1 इंच से 2 इंच तक की वृद्धि हो जाती है। लिंग के इन ऊतकों व पेशी को सुगठित करने के लिए हर्बल इलाज की आवश्यकता होती है जिससे शीघ्र लाभ होता है। इस इलाज से शीघ्रपतन दूर होता है, नपुंसकता व यौन समस्याओं से मुक्ति, लिंग की लम्बाई व मोटाई में वृद्धि, वीर्य में शुक्राणुओं की वृद्धि, प्रोस्टेट ग्रन्थि की कार्यक्षमता को बढ़ाता है, बार-बार पेशाब से छुटकारा होता है, यौन क्षमता बढ़ाता है, लिंग में पूर्ण कठोरता व उत्तेजना होती है, आत्मविश्वास बढ़ाता है, टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की वृद्धि करता है। इस इलाज का कोई साईड इफैक्ट भी नहीं होता है।
सिकंदर-ए-आज़म कैप्सूल एक हर्बल दवा है जो सेक्स की अपक्षयी जटिलताओं और यौन प्रदर्शन तथा सहनशक्ति में वृद्धि करता है तथा सेक्स करते समय आ रही सभी समस्याओं से मुक्ति दिलाने में आपकी मदद करता है. सिकंदर-ए-आज़म कैप्सूल सुरक्षित और प्रभावी है यह कामेच्छा बढ़ाता है. यह एक अनूठा कैप्सूलहै जो समय से पहले थकना या शीघ्र पतन हो जाना आदि समस्याओं को भी दूर करता है.
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सिकंदर-ए-आज़म कैप्सूल एक 100% हर्बल जड़ी बूटी युक्त एक कैप्सूल के रूप में दवाई है जोकि सेक्स करते समय व्यक्ति के शरीर में होने वाली कमजोरी, लिंग में तनाव की कमी, शरीर में दर्द, आदि शिकायतों से राहत प्रदान करने में मदद करता है
यह प्राकृतिक रूप से लिंग की वृधि के लिए भी काम करता है दैनिक रूप से एक कैप्सूल, नयी उमंग नया जोश पैदा करता है साथ ही पुरुषों में नपुंसकता की सारी समस्याओं को दूर करता है. सिकंदर आजम कैप्सूल, सिर्फ एक बार एक दिन में सेवन करने से यह लिंग में रक्त प्रवाह को तीर्व कर देता है और कार्पस केवेरनोसम नामक उतक में रक्त इकट्टा होकर लिंग का आकर बढ़ा देता है. सिकंदर आजम हर्बल कैप्सूल फार्मूले की मदद से आप पहले से कहीं ज्यादा बेहतर सेक्स करने में सफल होंगे. अब तक दुनिया भर के लाखों पुरुषों को प्राकृतिक रूप से लाभ पहुंचा चूका है.
सिकंदर-ए-आज़म कैप्सूल के लाभ
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सिकंदर-ए-आज़म हर्बल कैप्सूल कितनी प्रभावशाली होता है?
शारीरिक अथवा मानसिक कारणों से लिंग के खड़े न हो पाने के रोग में सिकंदर आजम का उपयोग किया जाता है। जिन पुरूषों को हृदय तंत्री का रोग, मौल्लिटस मधुमेह, उच्च रक्त चाप, अवसाद हृदय की बाईपास सर्जरी हो चुकी हो और जो पुरूष अवसाद मुक्ति या रक्त चाप से मुक्ति देने वाली दवाएं लेते हैं उन में लिंग को खड़ा करने के लिए इसे प्रभावशाली माना जाता है। चिकित्सा प्रयोगों में, देखा गया है कि मधुमेह वाले 60 प्रतिशत और बिना मधुमेह वाले 80 प्रतिशत लोगों को सिकंदर आजम से लिंग के खड़े होने में बेहतर मदद मिलती है।
सिकंदर-ए-आज़म कितनी मात्रा में लेनी चाहिए?
सिकंदर आजम देते समय डॉक्टर रोगी की उम्र स्वास्थ्य की सामान्य स्थिति और जो दवाएं वह ले रहा हो उन सब का ध्यान रखता है। प्रारम्भ करने की अधिकतर पुरूषों में एक कैप्सूल होता है, पर सह प्रभावों एवं प्रभविषुणता को देखते हुए डॉक्टर मात्रा को बढ़ा या घटा सकता है।
सिकंदर-ए-आज़म किस प्रकार दिया जाना चाहिए?
सिकंदर-ए-आज़म कैप्सूल के रूप में उपलब्ध है। सम्भोग परक गतिविधि के प्रारम्भ के एक घन्टा पहले इसे लेना चाहिए। श्रेष्ठ परिणाम के लिए इसे खाली पेट लेना चाहिए क्योंकि खाने के बाद, यदि गरिष्ठ भोजन किया हो तो इसका प्रभाव और स्राव घट जाता है।
सिकंदर-ए-आज़म के सह प्रभाव क्या होते हैं?
बिना विशेष सह प्रभावों के सिकंदर-ए-आज़म अधिकतर लोगों को लाभ पहुंचता है। इस दवा के हर्बल होने के कारण अब तक कोई सह प्रभाव सामने नहीं आया है

